विकलांगता को सम्मान
UNSUNG HERO
मत कीजिये कभी अपमान,दीजिये विकलांगों को सम्मान !
मत कहिये उनको अपंग या विकलांग,पुकारिये "दिव्यांग" !!
तनिक गंभीरता से सोचिये ,उन में बसते हैं स्वयं भगवान !
वे स्वावलम्भी तथा आदरणीय हैं,मैंने जीवन में देखे प्रमाण !!
मैंने बचपन में प्रत्यक्ष देखे थे कुछ ऐसे ईश्वर रुपी व्यक्ति।
परमात्मा से पायी थी उन्हों ने ऐसी अद्भुत कामशक्ति !!
केवल एक बाएं हाथ वाला देखा था एक रिक्शे वाला !
सारे नगर में था उसकी गति और शक्ति का बोलबाला !!
फिर मैंने युवावस्था में दो जन्मांध अध्यापकों को देखा !
सहिष्णुता तथा कर्मठता की बनी थी उनकी भाग्यरेखा !!
घर में स्टोव जलाना,खाना पकाना,बसों में काम पे आना !
कक्षा में विषय पर लगन तथाअनुशासित ढंग से पढ़ाना !!
इतिहास साक्षी है सूरदास ने किया सजीव बालकृष्ण वर्णन !
भारतीय दिव्यांग अरुणिमा का अमर है हिमालय आरोहण !!
एक नेत्र वाले राजा रणजीतसिंह हैं कुशल प्रशासक महान !
अल्पकालिक है सौंदर्य,सब पाकर भी कुछ बनते विकलांग !!
*****नरेन्द्र चावला-वर्जीनिया-अमेरिका*****
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