नारी सदा पुरुषों पर भारी !
--नहीं--
नारी सदा पुरुषों की प्रभारी !!
सर्वथा सत्य है जन्म से मृत्यु तक ,किसी न किसी रूप में !
उषाकाल से सायंकाल तक,जीवन की छाया अथवा धूप में !
विभिन्न नामों से छाई जगत में जैसे सरस्वती शिक्षा की देवी !
लक्ष्मी रूप में है धन की देवी तथा गायत्री संस्कृति की देवी।।
निशा रजनी में चांदनी,सपना तथा पुष्पों में सुरभि बन आती है!
धर्म-कर्म में पूजा ,गीता , वंदना और आरती बन छा जाती है !!
वृद्ध और रोगियों के लिए-आराधना तथा करुणा बन आती है।
तनावग्रस्त अवस्था में प्रीति,आशा,शांति रूप में मन बहलाती है।!
रण-क्षेत्रों में सैनिकों हेतु प्रेरणा, जयति तथा विजेता आयी बन।
उज्व्वल भविष्य की किरण बन, सुधारा विद्यार्थियों का जीवन।।
सर्वमान्य है सम्पूर्ण विश्व है,नारी जाति से ही पावन व खुशहाल!
सरस्वतीब्रह्मा की,लक्ष्मीविष्णु की,पार्वतीशिव की हैंअटूट ढाल!!
माँ ,बेटी ,बहन तथा पत्नी बन कर नारी ने ही सुधारे परिवार।
आधुनिक युग में प्रत्येक क्षेत्र में सक्षम,नारी जाति को नमस्कार।। नरेन्द्रचावला*भारत*अमरीका