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Monday, May 1, 2023

श्रमिक ***नरेन्द्र चावला

हम प्रतिवर्ष श्रमिक दिवस गर्व से मनाते आ रहे हैं।
परंतु श्रमिकों के जीवन उत्थान को भूलते जा रहे हैं।।
21वीं सदी में भी वे सर पर तसले व ईंटें उठाते हैं।
पत्र पत्रिकाओं में उनके लिए भाषण,कविताएं गाते हैं।।   मजदूर आज भी सड़क किनारे दिहाड़ी को हैं ललचाते। 
जबकि ठेकेदार तथा बिल्डर निरंतर धनी हैं होते जाते।।
बनाते हैं हमारे लिए महल,घर व मॉल सुंदर आलीशान।
पूरासाल कभीनहींजाता,स्वार्थी नेताओ का इनपर ध्यान।
न तो इनका कोई बीमा,शिक्षा का प्रबंध करता है।
यह मजदूर झोंपड़ी में पैदा और झोंपड़ी में ही मरता है।।
क्या कभी ये भी अमेरिकन मजदूरों जैसे कार में आयेंगे।
सपना ही होगा तब हम शान से श्रमिक दिवस मनाएंगे।।
*******नरेन्द्र चावला**वर्जीनिया**अमेरिका*******

हास्य कविता *बेचारा दामाद***नरेन्द्र चावला

                       हास्य कविता -बेचारा दामाद 

एक बार की बात है एक Businessman थे बड़े कामयाब !

     सारे शहर में उनका था बहुत ही रोबदाब !!

   मगर जब घर लौटते तो रहते थे हमेशा परेशान !

  क्योंकि उनकी पत्नी छोड़ती रहती थी,उनकी आदतों पर व्यंग बाण !! 

      एक बार साले की शादी का invitation आया !

       तुरंत पत्नी ने जाने का प्रोग्राम बनाया !!

शगुन वाले दिन पति बोले -"तुम बच्चों को लेकर चली जाओ। 

        मैं शाम को कुछ देर से पहुँच जाऊंगा "!!

        पति को वैसे भी थी ससुराल से कुछ एलर्जी !

         क्योंकि वहां उन की नहीं चलती थी मर्जी !!

         पहुँच तो गए शगुन के प्रोग्राम में सरकार !

     परन्तु इनके पास कोई शख्स बैठने को नहीं था तैयार !!

        वापिस घर आने पर होगई आपस में लड़ाई !

    " देख लिया मैंने सबको ,कोई नहींआया मेरे नज़दीक तेरा भाई "!!

    पत्नी ने चेक किया तो बोली- "खुल गया तुम्हारा भेद हुज़ूर !

  सूट और टाई तो नये पहने थे,पर गंदी जुराबें छोड़ रही थी बदबू दूर-दूर "!!

          दूसरे दिन सेहराबंदी पर , फिर लेट पहुंचे जनाब ! 

            मगर आज भी वही पुराना स्वागत होने लगा !

    हर आदमी उनसे दूर-दूर होने लगा ! अब तो वो खुलकर बोले ---

    "अरे क्यों दूर भाग  रहे हो आज --बिलकुल Brand new पहनी हैं !

    Proof के लिए गंदी रखकर लाया हूँ  जेब में आज "!!!!!!!!! 

************नरेन्द्र चावला-वर्जीनिया-अमेरिका****************