पापा-एक विशाल वृक्ष
कैसे बतलाऊँ मुझे अपने पापा से कितना है प्यार !
हर पल रहता दिल उनकी मधुर स्मृति में बेकरार !!
पापा होते हैं हम सबके जीवन में एक विशाल वृक्ष !
बच्चों की शिक्षा,पालनपोषण व सुरक्षा में पूर्ण दक्ष !!
"कर्म पूजा है" पापा के संस्कारों ने ऐसा पाठ पढ़ाया !
पाँव धरती पे रखना , आसमान में उड़ना सिखलाया !!
माता का अनुपम दुलार,पिता का सारथी सम व्यवहार !
निजी आवश्यकतायें तथा शौक दिए हम पर न्यौछार !!
मुझे पूज्य पापा ने संगीत व यज्ञ में संस्कृत श्लोक सिखाये !
प्यारी माता ने चरित्र के संग,काव्य-रचना के गुर बतलाये !!
मांबाप के संस्कार,पुस्तकों में रखे,सूखे पुष्पों सम नहीं मिलते !
वे तो हमारे जीवन में पग-पग पर पुष्प बन कर हैं खिलते !!
हमारी समस्त उपलब्धियों के साक्षी हैं माँबाप के ही संस्कार !
नरेन्द्र चावला कहे हमारी प्रगति का श्रेय है उनका आशीष व प्यार !!
**********नरेन्द्र चावला-वर्जीनिया-अमेरिका**********
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