"तिनके सी मेरी कहानी"
(1950/60के संजोय पल)
आज याद आ रही हैं मुझे 1950-60 की भारत की गलियों की कहानी !
सुबह आती थी मुर्गे की बाँग,मंदिर के शंख,मस्जिद की अज़ान सुहानी !!
अख़बारें आंगन,बालकोनी में गिरना और फेरीवालों की आवाज़ सुहानी !!
सबसे पहले आती थी "मोची-ई-ई" की सुरीली मीठी लम्बी तान !
तभी आता कबाड़ी,"बेचलो खाली डिब्बे,बोतलें,पुराना सामान" !!
"आलू,प्याज,गोभी,करेला.,घीया,टमाटर,भिंडी"ताजीसब्जी वाला !
अब आजाता दूधवाला,गन्ने का ताजा रस और नारियल पानी वाला !!
इसके बाद आती,'पुराने कपड़ों के बदले नए बर्तन लेलो' सुरीली तान !
दोपहर बाद आ जाती थी कुल्फी फलूदे वाली चलती फिरती दूकान !!
फिर आता था सबका चहेता,गोलगप्पे व चटपटी चाटपकौड़ी वाला !
शाम को आता औरतों की पसंद,रंगबिरंगी चूड़ियां,बिंदी,सुर्खी वाला !!
जिसकी आवाज़ सुनकर तुरंत घरों से निकल आती हर सुन्दर बाला !
इतवार को आता था डुगडुगी बजाते हुए मदारी,भालू -बंदर वाला !!
फिर आती थी रिक्शा लाऊडस्पीकर पे करने फिल्मों का प्रचार !
"लड़ाई,मारकुटाई,नाचगानों,महमूद,प्राण,जोनिवाकर वाली मजेदार !!
आज बहुत ही याद आ रहे हैं वो सुहाने मधुर-मनोहर सुनहरे पल !
बदला ज़माना,बच्चे-बूढ़े सभी मस्त हैं अपने मोबाईल पे आजकल !!
***नरेन्द्र चावला-वर्जीनियाअमेरिका***
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