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Monday, September 2, 2024

1950/60के संजोए मीठे पल***नरेन्द्र चावला

   

   "तिनके सी मेरी कहानी"

  (1950/60के संजोय पल)

आज याद आ रही हैं मुझे 1950-60 की भारत की गलियों की कहानी !

सुबह आती थी मुर्गे की बाँग,मंदिर के शंख,मस्जिद की अज़ान सुहानी !! 

अख़बारें आंगन,बालकोनी में  गिरना और  फेरीवालों की आवाज़ सुहानी !!

सबसे पहले आती थी "मोची-ई-ई" की सुरीली मीठी लम्बी तान ! 

तभी आता कबाड़ी,"बेचलो खाली डिब्बे,बोतलें,पुराना सामान" !!

"आलू,प्याज,गोभी,करेला.,घीया,टमाटर,भिंडी"ताजीसब्जी वाला !

अब आजाता दूधवाला,गन्ने का ताजा रस और नारियल पानी वाला !!

इसके बाद आती,'पुराने कपड़ों के बदले नए बर्तन लेलो' सुरीली तान ! 

दोपहर बाद आ जाती थी कुल्फी फलूदे वाली चलती फिरती दूकान !!

फिर आता था सबका चहेता,गोलगप्पे व चटपटी चाटपकौड़ी वाला !

शाम को आता औरतों की पसंद,रंगबिरंगी चूड़ियां,बिंदी,सुर्खी वाला !!

जिसकी आवाज़ सुनकर तुरंत घरों से निकल आती हर सुन्दर बाला !

इतवार को आता था डुगडुगी बजाते हुए मदारी,भालू -बंदर वाला !!

फिर आती थी रिक्शा लाऊडस्पीकर पे करने फिल्मों का  प्रचार !

"लड़ाई,मारकुटाई,नाचगानों,महमूद,प्राण,जोनिवाकर वाली मजेदार !! 

आज बहुत ही याद आ रहे हैं वो सुहाने मधुर-मनोहर सुनहरे पल !

 बदला ज़माना,बच्चे-बूढ़े सभी मस्त हैं अपने मोबाईल पे आजकल !!    

***नरेन्द्र चावला-वर्जीनियाअमेरिका*** 

  

      


  

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