अबतक कोई भी नहीं सुलझा पाया ये खूबसूरत पहेली !
कि ऐसे भी मिल सकते हैं,ज़िंदगी में प्यारे दोस्त-सहेली !!
आज जब मैंने देखा तो कुछ-कुछ समझ में है आया !
तितली और पुष्प के अदृश्य-प्यार ने है ये समझाया !!
मैंने देखा तितली अदाओं से उड़-उड़ करआती बार-बार!
चुम्बन,आलिंगन करके जता रही थी पुष्प से अदृश्य प्यार !!
न मालूम पुष्प को छोड़कर , फिर कहाँ गायब हो जाती थी !
उसे क्या मालूम कि ये जुदाई,पुष्प को कितना तड़पाती थेी!!
पुष्प तो सदा ही रहता था स्थिर काँटों में उलझा हुआ बेचारा !
तितली की भीनी-भीनी सुगंध में ही उसने पूर्ण जीवन गुजारा !!
सोचता होगा,फ़िज़ां में जरूर भेजेगा खुदा तितली को दोबारा !!
अमेरिका से नरेन्द्र चावला कहे ,पतझड़ के बाद आएगी बहार !
समय और दूरियों से कभी कम नहीं हो सकता अदृश्य -प्यार !!
*********नरेन्द्र चावला-वर्जीनिया-अमेरिका*************
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