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Sunday, September 15, 2019

मेरी 2007 की रचनाएँ - " मिलावट " ( Social Awareness )

     
मेरी 2007 की रचनाएँ - "मिलावट"
           ( Social   Awareness )

दुनिया भर की चमक-दमक में,जितनी भी दिख रही सजावट। 
नहीं कहीं असलियत इसमें ---सिर्फ मिलावट और दिखावट।।

 नकली आदर ,नकली प्यार, नमक,तेल, कपडा सब व्यापर।     
  विज्ञापनों व ब्रैण्ड का लेके सहारा, नकल से भरे पड़े बाजार।।  

  दूध-घी ,सब्ज़ी और फलों में,सरे-आम केमिकल की मिलावट।   चमक - दमक  ऐसी पैकेट में , बिकने में नहीं कहीं रुकावट।।

   खाने-पीने की बात से बढ़कर,दवा,ग्लूकोज़,रक्त के ऊँचे दाम। 
    पेट्रोल , डीज़ल तथा गैस में , मिलावट हो रही खुल्ले आम।।

     नकली धंधे , नकली नोट , चुनाव में नेता , नकली वोट।  
     नकली मंदिर,नकली पुजारी,पुलिस,अदालत,जेलें सारी।।

      अंत समय में रो-रो करके , पश्चाताप कर रहे  इंसान।   
      शिशुपाल जीवित हैं फिर से,सुदर्शन-चक्र चला भगवान।
      परिवर्तन शीघ्र ही होगा -----नरेन्द्र चावला का अनुमान।। 
नरेन्द्र कुमार चावला की दिल्ली की यादें - आज हैं रंग लाई। 
भारतीय लोकतंत्र में स्वस्थ राजनीती की,वांछित लहर आयी।। 
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