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Monday, July 6, 2026

अनमोल अविस्मरणीय मोती (1942 से1947)

         अनमोल अविस्मरणीय मोती  (Hafizabad 1942 --1947 )

   मुझे सदा झकझोरती रहती हैं,मेरे बचपन कीअनमोल मोती जैसी याद। 

   जीवन के 5 वर्ष बीते नरेन्द्र भवन में,(पाकिस्तान)गुजरांवाला हाफिज़ाबाद।।

   अपनी बड़ी बहनों की मदद से मैंने बनाया ,उस मधुर घर का मानचित्र। 

   रेलवे स्टेशन से अनाजमंडी तक,स्कूल व पोस्टआफिस जाता मार्ग पवित्र।।

   चलते ही कुछ दूरी पर पड़ती थी , दाहिने हाथ को एक प्यारी गली ! 

   जहाँ पर मेरी बाल्यावस्था की मधुरिम अनमोल मोती जैसी यादें पली।। 

 गलीमेंथेअब्दुल्ला,दयालसिंह, दरयाईलाल,मेरे दादा हवेलीराम का नरेन्द्र भवन। 

सामने के घर थे अमरना,आशा, भोला हलवाई,रघुनाथ,गनेशी और चाचा चमन।।

मेरे दादा हवेलीराम चावला का 1932 का 3 मंजिला,1935 में Electrified घर आलिशान। 

 इस 10 मरले घर के इलावा दादाजी के अकालगगढ़ में थे विस्तृत खेत-खलिहान।। 

 हाफिज़ाँबाद के बाजार में थीं, कपडे की,बर्तनों की और  चावला बूट हाऊस दुकान।

   ईमानदारी की ज़िंदगी के घर में गऊ माता तथा थी KP Pencil Industry महान।।  

   मुझे बहुत याद आता है अपने घर का संगमरमर का आकर्षक प्रवेश-द्वार। 

   ड्राइंगरूम में हॉलैंड का फिलिप्स रेडियो,HMV ग्रामोफोन संगीतमय संसार।।

मेरे दादा जी का सभी हिन्दू-मुस्लिम  करते थे , दिल से आदर-सत्कार। 

   मैं कैसे भुला दूँ अपने मां सुमित्रादेवी व पिता श्री प्यारेलाल का वो प्यार।।

   मुझे बताया गया कि मुझे पंजासाहब तथा वैष्णोदेवी के दर्शन करवाए थे ! 

    उस ज़माने में मेरे लिए Imported वस्त्र तथा खिलोने तक मंगवाए थे !!

    आज 2022 में अमेरिका में बैठ कर मधुर यादों के पन्ने पलट रहा हूँ !

    शायद ऐसी भी होती है ज़िंदगियाँ ,आज धीरे-धीरे समझ रहा हूँ !!

    कुछ स्वार्थी राजनैतिक नेताओं ने अंग्रेज़ों से मिल करवा दिया विभाजन !

अब भी समय है प्रेम-शांति से रहो , डोल रहा है मिली आज़ादी का चमन !!

कोई फर्क नहीं, करते रहिए आरती,नमाज़ या अरदास!

सच्चे इंसान की जरूर पहुंचती है, ईश्वर,अल्लाह तक आवाज।।

   **************** नरेन्द्र चावला - अमेरिका ******************* 

    

 

       

   

   

   

        

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