अनमोल मोती
संसार में बिखरे जगह-जगह पड़े हैं अनेक हीरे मोती।
पा सकता प्रत्येक मानव,यदि सकारात्मक शक्ति होती।।
ये मोती तो मिल सकते हैं, हम को निःशुल्क।
केवल सत्कर्मों द्वारा मानव धर्म निभाना है शल्क।।
सच्ची निस्वार्थ सेवा होती है एक अनमोल मोती।
सच्ची भावना गुप्तदान व परोपकार में सदा होती !!
ऐसा संभव है धर्म मठों में सामान आदि पहुँचाना !
किसी वृद्ध/असमर्थ व्यक्ति को बेनाम मदद दिलाना !!
ऐसे परोपकार करने से दोनों पक्ष हो सकते हैं संतुष्ट !
प्रभु स्वयं दूर कर देते,दोनों पक्षों के सभी दुर्लभ कष्ट !!
वस्तु नहीं,तो भी हो सकता है,अरदास तथा शुक्राना !
बिन मांगे मिल जाता दोनों पक्षों को मेहरों का अद्भुत खजाना!! ***नरेन्द्र चावला-अमेरिका***
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