अवसरवादी (Opportunists )
जब तक रहेंगे भारतवर्ष में ये अवसरवादी।
समुचित ढंग से नहीं मिलेगी हमें आज़ादी।।
आदिकाल से आज तक चापलूसों ने है देश को लूटा।
चाहे मुगल-शासन हो या ईस्ट इंडिया का लगा हो बूटा।।
बिकते रहे हैं हमेशा ये गद्दार और सदा बिकते ही रहेंगे।
जो भी लालच की रोटी फैंक दे,ये लोग उनके रंग में दिखते रहेंगे।।
इन्हीं स्वार्थी गद्दारों ने ही लुटने दिए,अपने मंदिर चुपचाप।
हरयुग में भीष्मपितामह बनकर देखतेरहेहम और आप।!
पदवियाँ पाकर,भूखंड लेकर,गाते रहते हैं मालिकों के गीत।
"साम दाम दंड भेद"नीति में फंसकर,गद्दारों के बन जाते मीत।।
इनके लिए अपना कोई धर्म-जाति नहीं,बदलते रहते हैं वेश।
हर समय तैयार रहते हैं बेचने को , अपना ईमान और देश।।
लगता है अब तो आएगा शीघ्र,भारत में वास्तविक लोकतंत्र।
जनसंख्या नियंत्रण तथा आरक्षणमुक्त का फूंका जायेगा मंत्र।।
*****नरेन्द्र कुमार चावला-भारत*तथा अमेरिका*****
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