पुरानी दिल्ली की याद ( 1)
नरेन्द्र चावला की सब पाठकों को नववर्ष की मुबारक़बाद !
अमेरिका में बैठे-बैठे आज पुरानी दिल्ली की आयी याद !!
याद आरहे हैं दिल्ली के मुगलिया दरवाज़े तथा चारदीवारी !
सुरक्षा करती थी नगर की ,खूबसूरत इमारतें लगती प्यारी !!
कुछ खंडहर तथा कुछ साबुत बची हैं निशानियां !
गर्व है अब इन धरोहरों के सुधार की हो रही हैं तैयारियां !!
खूनी दरवाजा,दिल्ली गेट,अजमेरी गेट, तुर्कमान गेट हैं बरकरार !
खंडहर चारदीवारी पर लाहोरी गेट, मोरी गेट ,कश्मीरी गेट हैं साकार !!
इनके इलावा अंग्रेज़ों द्वारा विश्वयुद्ध का है इण्डिया गेट प्रतीक !
गर्व है अब सरकार ने सुभाषचंद्र बोस की मूर्ति लगाई किया ठीक !!
चांदनीचौक बाजार की रौनक हुयी दुगुनी स्वच्छ खुला हुआ आकार !
आज भारतवर्ष में उत्तम सुविधाओं वाले बन रहे स्मार्ट शहर बाजार !!
विशेष प्रसन्नता हुयी धीरे-धीरे समाप्त किये जारहे गुलामी के खेल !
जैसे गुजरात में गर्व से स्थापित की गई, लौह पुरुष मूर्ति सरदार पटेल !!
वास्तव में अब जाग्रति आयी है,खुल गई भ्रष्टाचार की सब पोल !
स्वाभिमान से भारत माता की जय तथा वन्देमातरम के बजते ढोल !!
***नरेन्द्र चावला-वर्जीनिया-अमेरिका**
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