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Wednesday, December 18, 2024

संबंध/रिश्ते बचाओ ***नरेन्द्र चावला

        सम्बंध/रिश्ते बचाओ हार्दिक प्रेम से

यदि आप चाहते हो सम्बन्ध/रिश्ते रहें बरकरार !

तो याद रखना नरेन्द्र चावला की बातें दो चार !! 

इन रिश्तों के पौधों में डालते रहना,अपना प्यार !

दूसरा पुरानी बातों पर कभी मत करना तकरार !!

इन रिश्तों को देते रहना मुस्कुराहट का प्रकाश !

कितनी भी घटाएं छायें ,स्वच्छ रहता है आकाश !!

जैसे - जैसे प्यार भरी शीतल हवाएं आती रहेंगी ! 

शिकवे-गिले व धनी-निर्धन का भेद मिटाती रहेंगी !!

कमज़ोर होते रिश्तों को बचाओ बदल रहा ज़माना !

केवल निस्वार्थ प्रेम से इन्हें , मुरझाने से है बचाना !! 

******नरेन्द्र चावला-वर्जीनिया-अमेरिका*******

Wednesday, December 11, 2024

दो भजन गुरुजी की सेवा में*** नरेन्द्र चावला

        दो भजन गुरूजी पर

               ( 1 )

 जब कोई उलझन पड़ जाये,जब कोई बात बिगड़ जाये !

जब मन कुछ समझ नहीं पाये,तो आना गुरूजी के पास !

सतसंग में देना साथ -गुरूजी सुनेंगे शुकराना से अरदास !!

ओ संगत जी ----------ओ  संगत जी ------------  

जब मन में हो घबराना ,जब रोग लगें तड़पाना !

अच्छा नहीं लगे ज़माना,क्रोध, लोभ को ठुकराना !

सुमिरन का ले लेना सहारा,ॐ नमो शिवाय मंत्र है प्यारा !

ओ संगत जी---------- ओ संगत जी --------------

होगी ख़त्म दुखों की रात,मिलेगी खुशियों की सौगात ! 

 मानो -मानो बात--शुकराना करते रहो दिनरात !

ओ संगत जी ------------ ओ संगत जी -------------

ॐ नमो शिवाय ,शिवजी सदा सहाय -----------

ॐ नमो शिवाय ,गुरूजी सदा सहाय ----------------

                   ( 2 ) 

जागो गुरूजी हमें सदा देखते रहते हैं ------

हम फिर भी स्वार्थ,अहंकार जाल में उलझे रहते हैं !

तोड़ो झूठा ताना -बाना,आडम्बर का है ये ज़माना !

मोह माया की नदिया में , हम बहते रहते हैं !!

गुरूजी हमें  देखते रहते हैं --------------

जागों अबतो इस निद्रा से,गर चाहो सदा सुख पाना !

करते रहो सत्संग हमेशा और गुरूजी का शुकराना !!

गुरूजी कृपा बरसाते रहते हैं -गुरूजी हमें देखते रहते हैं !!

ॐ नमो शिवाय शिवजी सदा सहाय, गुरूजी सदा सहाय !!

*********नरेन्द्र चावला-वर्जीनिया-अमेरिका********** 

 

   

Monday, December 9, 2024

पराधीन सपनेहुं सुख नाहिं*** नरेन्द्र चावला

    पराधीन सपनेहुँ सुख नाहिं 

पराधीन सपननेहुँ  नाहिं। स्वाधीन जीव  सुखमय जग माहिं।।

   स्वाधीनता व्यक्ति का पुरुस्कार।मगर इसमें सम्भव एक विकार।।

   असीमित स्वाधीनता में अहंकार। व्यक्ति हो जाता स्वार्थी,बेकार।।

   मानव को रहना चाहिए सदा सावधान।कभी नहीं करे अभिमान।। 

   वर्ना जाति - धर्म के लफड़े। धनी - निर्धनों में सम्भव हैं झगडे।। 

   नयी नस्ल को रखें संस्कृति से जोड़। वर्ना पतन का सम्भव मोड़।।

   भारतवर्ष इसका स्थूल उदाहरण। राजनीति में स्वार्थ है कारण।। 

    स्वाधीनता का हो रहा दुरूपयोग। लोकतंत्र में  लग रहे हैं  रोग।। 

**नरेन्द्र चावला-गुरुग्राम-भारत**


 

    


घर के बाहर*** नरेन्द्र चावला

              घर के बाहर (वरिष्ठजनों हेतु )

मेरा निवेदन है वरिष्ठजनो से तथा जो हो चुके हैं सेवानिवृत !

घर के भीतर कम और बाहर रहोगे अधिक,तो रहोगे तनावमुक्त !!

बिस्तर में हरदम बैठे रहना तथा टी वी देखना,कम कीजिये हुजूर ! 

वर्ना धीरे-धीरे कोई न कोई रोग,तुम्हें एक दिन फंसा लेगा जरूर !!

बाहर घूमते रहोगे तो खुली हवा में,हँसते-मुस्काते तथा गाते रहोगे ! 

प्राकृतिक प्रांगण में नए-नए लोगों से परिचय से मन बहलाते रहोगे !!

अरे भाई ताश खेलो, शतरंज खेलो ,अंताक्षरी करो ,गप्पें लड़ाओ !

कवितायेँ लिखो,चित्र बनाओ,इच्छानुसार वस्त्र पहनो,नाचो गाओ !! 

योग-प्राणायाम नित्य करना,अपनी सामर्थ्य अनुसार यात्रा पर जाना ! 

किसी का बुरा कभी मत सोचना,भोजन समय पर कम

ही खाना।।

घर में सबसे प्रेम व विनम्र स्वभाव से रहना ,जल्दी सोना,जल्दी जगना !

एक बात और है जरूरी शिशुओं संग बतियाना व प्रभु सुमिरन करना !

नरेन्द्र चावला कहे घर को सदा समझना आशियाना।।


 ************नरेन्द्र चावला-वर्जीनिया-अमेरिका*************