अंतर्राष्ट्रीय महिला वर्ष
प्रतिवर्ष की तरह ,आज फिर आ गया महिला वर्ष।
सम्पूर्ण विश्व के साथ, भारत भी मना रहा है हर्ष।। विभिन्न मंचों पर , नारी को दिया जा रहा है सम्मान ।
परन्तु भारत में व्यवहारिक रूप से,सब मन से हैं परेशान।।
क्या वास्तव में महिला वर्ष मनाने के हम हैं अधिकारी ?
दिन प्रतिदिन सरेआम भारत में,प्रताड़ित होरही है नारी।
वैसे तो हम महिला को,दुर्गा, सरस्वती का प्रतीक हैं मानते।
शक्ति , बुद्धि , लक्ष्मी , दया-शान्ति-------- रूपेण हैं जानते।।
परन्तु भारत के शिक्षित नेता व् वकीलों की सुनिए अभद्र भाषा लड़की"एक मिठाई का डिब्बा है,खाओऔर पूरी करो अभिलाषा"।।
एक तरफ हम "बेटी बचाओ--बेटी पदाओ" का नारा लगाते हैं।
और दूसरी ओर " निर्भया - काण्ड", सरे आम होते जाते हैं।।
अब शीघ्र ही बदलेगी --- नारी अपनी तक़दीर ?
जब चण्डि-रूप ले कर ही,नारी उठाएगी शमशीर।।
====== नरेन्द्र चावला की आवाज़ =======
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