आज हम सब भूल गए,कितनी आवश्यक है स्वयं सुरक्षा करना।
केवल याद रही अपने, अपने आराध्यों की पूजा,अर्चना करना।।
नरेन्द्र चावला कहे अपने आराध्यों की छवि तनिक गौर से निहारो।
उनके दोनों हाथों को भी देखो , केवल चरण ही मत पखारो।।
प्रत्येक के एक हाथ में हैं पुष्प,शंख वरदान के कोमल रूप ।
और दूसरे हाथ में होते,विध्वंसक शस्त्र लिए विकराल रूप।।
आक्रामक चक्र ,भाले , कटार , खड़ग ,धनुषबाण तथा त्रिशूल।आतंकी बादल सर पर निरंतर गरज रहे हैं,हम सब रहे हैं भूल।।
हमारी संस्कृति सिखाती,बनो अहिंसा के पुजारी।
शस्त्र उठाओ,करदो ख़त्म तुरंत ही सब अत्याचारी।।
देखिये पशु पक्षियों को हमारे उपयोगी हैं लगते कितने प्यारे।
परंतु वक्त आने पर अपनी सुरक्षा सींगों,पंजों से करते सारे।।
अब वक्त आ गया है हिंसा का ,हिन्दुओ,जागो,शस्त्र उठाओ।
त्यागो घंटे ,शंख बजाना ,आतंकियों को जड़ सहित हटाओ।!
******नरेन्द्र चावला-वर्जीनिया अमेरिका*******
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