मृत्युन्जय मंत्र
सारा जीवन तो सांसारिक मानव करता रहा ठाठ-बाठ !
जब अंत समय आता तब याद आता है मृत्युंजय पाठ !!
कोई बात नहीं , प्रसिद्द कहावत है जब जागे तब सवेरा !
मत घबराईये अवश्य होगा सूर्योदय और मिटेगा अँधेरा !!
बचपन में खेलकूद,शिक्षा,फिर की व्यवसाय,नौकरी तलाश !
यौवन में दुर्व्यसनों से किये,स्वयं को बचाने के पूर्ण प्रयास !!
"सुबह का भूला शाम को लौट आये तो भूला नहीं कहलाता"!
प्रभु का धन्यवाद , वही सदा नेकी का सद्मार्ग है दिखलाता !!
इस फ़रेबी जग में मिले कुछ तो सच्चे पथप्रदर्शक प्यारे यार !
उन्हीं की मधुर मिलन से नरेन्द्र चावला के जीवन में है बहार !!
पाया संगीत ,काव्यरचना रचना तथा गुरु-सतसंग का आधार !
शायद यही होता है वरिष्ठ नागरिकों के लिए समुचित उपचार !!
ॐ त्रयबंकम यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्ध्नम,उर्वारुक्मी ववंदनाम !
मृत्योर्मुक्षी यमामृतात।। **** नरेन्द्र चावला-अमेरिका ******
